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।। कमिशनर के चेम्बर मे बैठे बी.डी ओ गौर डी.सी मनरेगा संजय शर्मा ।।

।। कमिशनर के चेम्बर मे बैठे बी.डी ओ गौर डी.सी मनरेगा संजय शर्मा ।।

जनपद बस्ती के विकास खंड गौर में विकास खंड अधिकारी (बी.डी.ओ.) के.के. सिंह के नेतृत्व में कथित भ्रष्टाचार और ग्राम पंचायतो में मनरेगा योजना के तहत मानसरोवर के कार्य में चकबन्द निर्माण कार्यो मे बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हाजिरी दर्ज की जारही है। ग्राम पंचायतो में मानसरोवर (संभवतः तालाब या जल संरक्षण संरचना) के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। ग्रामीणों का दावा है कि:

कार्य रात 11 बजे जे.सी.बी. मशीन से खुदायी का काम कराया गया, जो मनरेगा के नियमों का उल्लंघन है, क्योंकि मनरेगा में मशीनों का उपयोग सीमित और विशेष अनुमति के अधीन होता है।

प्रतिदिन 180 मजदूरों की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज की जा रही है, जो पूरी तरह से फर्जी है, क्योंकि वास्तव में इतने मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद नहीं हैं।प्रधान सचिवो के मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का यह कार्य कराया जा रहा है, और बी.डी.ओ गौर- के.के. सिंह की अगुवाई में यह भ्रष्टाचार खुलेआम हो रहा है।मनरेगा के दिशानिर्देशों के अनुसार, कार्यों में मशीनों का उपयोग न्यूनतम होना चाहिए, और मजदूरी मुख्य रूप से अकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए होती है। रात में जे.सी.बी. से कार्य कराना और फर्जी हाजिरी दर्ज करना स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।मीडिया टीम के कैमरे में मौके पर केवल 13 से 15 मजदूर कार्य करते पाए गए, जबकि मस्टर रोल में 190-180 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की जा रही है। यह फर्जी हाजिरी का स्पष्ट मामला है, जो मनरेगा नियमों का उल्लंघन है। ग्रामीणों ने बताया कि गावो में कोई विकास कार्य नहीं हो पाल हा है, फर्जी मास्टरोलो के खेल से प्रधान रोजगार सेवक व सचिव मिलकर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। रात में जे.सी.बी. मशीन से सरोवर की खुदाई करवाने का दावा भी इस बात की पुष्टि करता है कि कार्य में मशीनों का अनधिकृत उपयोग हुआ, जो मनरेगा के दिशानिर्देशों के खिलाफ है। बस्ती में मनरेगा कार्यों की निगरानी में ढिलाई इसलिए किया जा रहा है क्योकि बी.डी ओ ,डी सी मनरेगा संजय शर्मा जैसे जिम्मेदार अधिकारी फर्जी मास्टर रोल और कार्यों की गलत रिपोर्टिंग कर रहे है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे है।बस्ती जिले में भ्रष्टाचार के इन मामलों में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई की खबर नहीं हुई है।, इन शिकायतों के बावजूद, भी बस्ती जिले में ठोस कार्रवाई की कमी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है,इस निष्क्रियता का परिणाम भ्रष्टाचारियों के बढ़ते मनोबल के रूप में सामने आ रहा है, क्योंकि दोषियों पर कार्रवाई न होने से उनकी हिम्मत बढ़ रही है।

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